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हंसी कभी रोने का मुआवज़ा नहीं होती,
सिर्फ खोना कुछ पाने की वजह नहीं होती ..

खुदा सबकी कहानी लिखता तो है लेकिन,
हर अधूरी कहानी यहाँ पूरी नहीं होती

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.. तो अच्छा है

तूफ़ान क़ैद-ए-दिल में रहे, तो अच्छा है
अरमान दिल में दम तोड़े, तो ही अच्छा है

मिलते ही रहते है, लोग, हर मोड़ पर मगर
किसी से कोई रिश्ता, न बने, तो ही अच्छा है

उम्मीदों से अक्सर, डूब जाते है रिश्ते
किसी की उम्मीद न बने, तो ही अच्छा है

न लफ्ज़ न जज़्बात, समझ पाया है कोई
यह अंदर छुपे रहे, तो ही अच्छा है

दर्द-ए-दिल बांटने से, दिल से तो नहीं जाता
यह बोझ खुद ही उठाये, तो ही अच्छा है

आज देर से ही सही, कुछ तो समझ पाया हूँ
अब वोह हमें बुरा ही समझे, तो ही अच्छा है 

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ये लोग

अपनी नीयत से सुनते है लोग
अपने ही नज़रिये से देखते है लोग
दोस्त बनाते तो है लेकिन
अपने ही प्यार में जीते है लोग
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छूटा हुआ रास्ता

गलतियां सुधारने के मौके
उम्र के साथ कम हो जाते है
ज़िन्दगी को उम्मीदों के सपने
फिर आने से भी मुकर जाते है..

अब वह दिखने लगता है
जिसके आगे कुछ नहीं
और वह याद आता है
जिसने अब तक साथ छोड़ा नहीं

पुराने ज़ख्मों को
अब मरहम का इंतज़ार नहीं
इस बार की पतझड़ के बाद
कोई बसंत वाली बहार नहीं

फिर भी दिल सोचता है
के काश, टूटा हुआ जुड़ जाए
वह छूटा हुआ रास्ता
एक बार तो मिल जाए..

वह छूटा हुआ रास्ता
एक बार तो मिल जाए..


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हाँ, सीख गया हूँ मैं

अब कोई बात, चुभती नहीं
अब किसी की कमी, सताती नहीं
आँखों तक आते आते, गम सूख जाते है
अश्क़ों में अब कोई, नमी होती नहीं

लगता है के अब, कमज़ोर न रहे
शायद दिल से, मझबूर न रहे
कहकहे लगते है आज
के जज़्बातों से अब, परेशां न रहे

दुनिया कहती थी, बचपना छोड़ दो
प्यार मोहब्बत का, फ़साना छोड़ दो
कहती रही, के बड़े हो जाओ
किसी के लिए खुद को, खोना छोड़ दो

लगता है अब, सीख गया हूँ मैं
अकेले रहना, मान गया हूँ मैं
इंसान ही हूँ आज भी लेकिन
अपनी पहचान भूलना, सीख गया हूँ मैं..

अपनी ही पहचान भूला देना, सीख गया हूँ मैं!


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उसूल

कुछ अलग ही उसूल है इस दुनिया के..
यहाँ अपनाने वाले से ज्यादा
ठुकराने वाले की इज़्ज़त होती है,

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भरोसा

आज अपने उस भरोसे पे भरोसा रख
अँधेरा है तो उस झरोके पे भरोसा रख
आज कोई नहीं तो क्या हुआ?
आज तू अपने आप पर भरोसा रख !

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मुरझा गयी है ज़िन्दगी
जो खिल गयी थी तेरे आने से,
बुझ गयी वह रौशनी
जो जीत जाती थी मेरे अंधेरो से


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कहानी

जब भी वह कहानी याद आती है
उसकी आखरी घडी बड़ा सताती है..
वह घडी, जो आयी थी हमेशा की तरह
और चोंट दे गयी थी, किसी मौत की तरह

ज़िन्दगी बिखर सी गयी, उस घडी के बाद
हमें ज़िंदा न रख सकी, उसकी याद के साथ
मैंने वापस, बुलाया भी था उसे,
बेहला फुसला कर, मनाया भी था उसे

मगर वह घडी kabhi आयी नहीं
दिल और दिमाग से गयी नहीं
ज़िन्दगी की किताब अधूरी छोड़ गयी
और मेरी कहानी, मिटा कर गयी

मेरी कहानी मिटा कर गयी...


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तेरी और मेरी ..

ये अलग अलग ज़िंदगी, तेरी और मेरी
अपनी अपनी दुनिया, तेरी और मेरी
फिर भी ये यारी,
एक अलग ही कहानी, तेरी और मेरी..

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