ये लोग
अपनी नीयत से सुनते है लोग
अपने ही नज़रिये से देखते है लोग
दोस्त बनाते तो है लेकिन
नाराज़ नहीं तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
ऐसे ही तो होते है लोग
रोज़ किसी न किसी बहाने से लेकिन,
मिलते ही रहते है ये लोग
जान गया हूँ आखिर,
के अपने होकर भी पराये है लोग
मुस्कुराते है चेहरेे पर मगर,
मन में खोट रखते है लोग
मेरी कहानी सुनते तो है लेकिन
अपनी ही दुनिया में खोये है लोग
बाद मरने पर मेरे,
बहोत मिलने आएंगे लोग
अपनी यादों में मुझको
फिर रोज़ बुलाएँगे लोग
यहीं सामने था उनके कुछ ही दिन पहले
अब जाकर, मुझको ढूंढ़ने लगेंगे लोग..
कहते है,एक पन्ना खो गया उनकी किताब से
कुछ ऐसी कहानियां बनाते है लोग
जब ज़िंदा था, तो मिलते नहीं
मरने के बाद बहोत अपना बनाते है लोग
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