कहानी
जब भी वह कहानी याद आती है
उसकी आखरी घडी बड़ा सताती है..
वह घडी, जो आयी थी हमेशा की तरह
और चोंट दे गयी थी, किसी मौत की तरह
ज़िन्दगी बिखर सी गयी, उस घडी के बाद
हमें ज़िंदा न रख सकी, उसकी याद के साथ
मैंने वापस, बुलाया भी था उसे,
बेहला फुसला कर, मनाया भी था उसे
मगर वह घडी kabhi आयी नहीं
दिल और दिमाग से गयी नहीं
ज़िन्दगी की किताब अधूरी छोड़ गयी
और मेरी कहानी, मिटा कर गयी
मेरी कहानी मिटा कर गयी...
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