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Showing posts from December, 2011

ज़िन्दगी एक किताब

रोज क्या लिख्खे ज़िन्दगी के पन्नो पर,
एक किताब है ये.. कहीं खाली ना रह जाए..

आखिर कहाँ जाऊ, दिन भर भटकता हुआ,
चंद घंटे है, कहीं रात ना हो जाए ..


ज़िन्दगी उस खयाल की तरह है,
जो कल रात को आया था..

जिसे याद रखने के लिए,
मैंने रोज एक निशाना रख्खा था ..


आज उस निशाने को,
फिरसे ढूँढ रहा हूँ..

जैसे ज़िन्दगी जीने के लिए,
रोज बहाना ढूँढ रहा हूँ ..


आखिर क्या लिख्खू,
के ये किताब खाली ना लगे..

पन्ने पन्ने से सुलझती हुई,
एक कहानी लगे….

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हौसले

कौन कहेता हैं के हौसले बुलंद नही
या नही हैं इरादे जवां
कुछ देर ही सही
ये ज़िन्दगी अपनी मनमानी छोड़ तो दे ..!

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