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Showing posts from December, 2011

ज़िन्दगी एक किताब

रोज क्या लिख्खे ज़िन्दगी के पन्नो पर,
एक किताब है ये.. कहीं खाली ना रह जाए..

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हौसले

कौन कहेता हैं के हौसले बुलंद नही
या नही हैं इरादे जवां
कुछ देर ही सही
ये ज़िन्दगी अपनी मनमानी छोड़ तो दे ..!

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