.. तो अच्छा है

तूफ़ान क़ैद-ए-दिल में रहे, तो अच्छा है
अरमान दिल में दम तोड़े, तो ही अच्छा है

मिलते ही रहते है, लोग, हर मोड़ पर मगर
किसी से कोई रिश्ता, न बने, तो ही अच्छा है

उम्मीदों से अक्सर, डूब जाते है रिश्ते
किसी की उम्मीद न बने, तो ही अच्छा है

न लफ्ज़ न जज़्बात, समझ पाया है कोई
यह अंदर छुपे रहे, तो ही अच्छा है

दर्द-ए-दिल बांटने से, दिल से तो नहीं जाता
यह बोझ खुद ही उठाये, तो ही अच्छा है

आज देर से ही सही, कुछ तो समझ पाया हूँ
अब वोह हमें बुरा ही समझे, तो ही अच्छा है 

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