एहसास
ज़िक्र गलती से हुआ, ये भी कुछ कम नहीं
वरना दुनिया में होकर भी, इस दुनिया के नहीं थे ..
किसी ने कांटे की तरह ही सही, अपने साथ तो लिया
वरना इतने सफ़र के बाद भी, कही पहुंचे ही नहीं थे ..
जब प्यास लगी, तो अपने ही आंसू पी गये हम
वरना किसी भी प्याले में, हम एक बूँद भी नहीं थे ..
सोचा था, के खुद अपनी भी एक हस्ती बनायेंगे
लेकिन रिश्ते में तो हम, अपने साये के भी नहीं थे ..
कई बार चल पड़े, खुद को ढूंडने मगर,
इस दुनिया की भीड़ में, हम कहीं नहीं थे ..
इस दुनिया की भीड़ में, हम तो कहीं नहीं थे ..
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