उम्मीद

क्यों करे ज़िन्दगी से, उम्मीद कोई
और उसके टूटने तक, कोशिशें नयी,
एक बार ज़िन्दगी तू बता ही दे
के मेरी किस्मत में वोह बात ही नहीं ..

एक साया भी नहीं मिला
धुप में जले बिना,
एक हमदर्द भी नहीं मिला
दिल टूटे बिना ..

कुछ मिला भी है
तो सिर्फ गवाने के बाद,
फूल खिले भी है
तो बागबान मर जाने के बाद ..

यहाँ मिलने की ख़ुशी से ज्यादा
खोने का गम मिला,
हस्ते हुए पलों में भी
रोने का ही साथ मिला ..

किस्मत पे कभी भरोसा न था
खुदी से कभी शिकवा न था
और अब लगता है
मेरे साथ कोई खुदा ही न था ..

ऐसी ज़िन्दगी को
कोई कैसे जिये,
वीरान रास्तों पर
चले, तो किसके लिये 

Comments

Popular posts from this blog

मत हस

एहसास

कल